चीनी कंपनी ने बनाई अनोखी स्मार्टफोन बैटरी, 50 साल तक नहीं करना होगा चार्ज, इस टेक्नोलॉजी का है अहम रोल

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हाइलाइट्स

चीन ने एक स्मार्टफोन बैटरी बनाई, जो 50 साल तक चलेगी.
आपको कभी भी अपना स्मार्टफोन चार्ज नहीं करना पड़ेगा.
इसी तकनीक का उपयोग पेसमेकर में किया जाता है.

Nuclear Batteries for Smartphone: सूचना टेक्नोलॉजी की तेज रफ्तार के दौर में स्मार्टफोन (Smartphone) दिन पर दिन अधिक पावरफुल होते जा रहे हैं, जबकि हमने पिछले कुछ दशकों से बैटरी टेक्नोलॉजी में कोई खास बड़ा सुधार नहीं देखा है. परमाणु बैटरियों (Nuclear Batteries) की बदौलत फिलहाल यह हालात अब शायद बदलने जा रहा है. चीन की एक कंपनी बीटावोल्ट टेक्नोलॉजी एक रेडियोन्यूक्लाइड बैटरी ( Radionuclide Battery) विकसित कर रही है, जो 50 साल तक चल सकती है. इसका मतलब है कि आपको कभी भी अपना स्मार्टफोन चार्ज नहीं करना पड़ेगा. आइए जानते हैं कि ये परमाणु बैटरियां किस तरह से मोबाइल फोन के क्षेत्र में क्रांति ला सकती हैं.

चीन की बीटावोल्ट टेक्नोलॉजी एक ऐसी परमाणु बैटरी को बनाने पर काम कर रही है, जो स्मार्टफोन में फिट हो सकती है और लगातार 50 साल तक चल सकती है. इसी तकनीक का उपयोग पेसमेकर में किया जाता है. जो एक छोटा, बैटरी चालित उपकरण होता है और दिल के रोगियों की धड़कन को कंट्रोल करता है. इसका उपयोग अंतरिक्ष यात्रा में अंतरिक्ष यान यान के उन घटकों को बिजली सप्लाई में भी किया जाता है जो सूर्य से बहुत दूर रहते हैं.

पहले की कोशिशें सफल नहीं हुईं
बहरहाल स्मार्टफोन के लिए परमाणु बैटरी बनाने की पहले की कोशिशें सफल नहीं हुए क्योंकि वे बहुत बड़ी थीं या स्मार्टफोन के लिए पर्याप्त बिजली नहीं दे सरती थीं. वैसे भी स्मार्टफोन पर प्लूटोनियम जैसी रेडियोधर्मी सामग्री का उपयोग करना खतरनाक होता. इसलिए बीटावोल्ट टेक्नोलॉजी इस बार एक अलग रास्ता अपना रही है. यह एक रेडियोन्यूक्लाइड बैटरी विकसित कर रही है, जिस पर कृत्रिम हीरे की एक परत होती है और यह अर्धचालक परत के रूप में कार्य करती है. इसके अलावा निकल आइसोटोप (निकल-63) का क्षय होता है और उससे ऊर्जा पैदा होती है.

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इन परमाणु बैटरियों से कोई जहरीला रसायन पैदा नहीं होता
ये परमाणु बैटरियां मौजूदा लिथियम बैटरियों की तुलना में 10 गुना अधिक ऊर्जा घनत्व वाली हैं. परमाणु बैटरियां 1 ग्राम बैटरी में 3,300 मेगावाट-घंटे स्टोर कर सकती हैं और बैटरी खराब होने की कोई समस्या नहीं है. इसके अलावा परमाणु बैटरियों पर कठोर वातावरण और लोड का असर नहीं होता हैं क्योंकि इन बैटरियों का बिजली उत्पादन स्थिर होता है. कंपनी का लक्ष्य अगले दो साल में एक वाट तक बिजली पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी को बढ़ाना है. इस तकनीक के बारे में अच्छी बात यह है कि सिस्टम से कोई रेडिएशन बाहर नहीं निकलता है और निकल आइसोटोप तांबे में टूट जाता है. जिसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया में कोई जहरीला रसायन पैदा नहीं होता है. हालांकि यह बैटरी टेक्नोलॉजी में एक आशाजनक विकास है, मगर इसके लिए अभी इंतजार करना होगा और देखना होगा कि क्या यह तकनीक स्मार्टफोन पर बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए कारगर है.

Tags: Nuclear Device, Nuclear Energy, Smartphone, Smartphone review

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