स्‍कूल बस या कार में ट्रैवल करते ही बच्‍चों को होती है वोमिटिंग, 5 बातों का रखें ख्‍याल, हंसते-खेलते करेंगे सफर

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हाइलाइट्स

वोमिटिंग महसूस हो तो तुरंत गाड़ी रोकें और बाहर वॉक करने के लिए कहें.
उतरना संभव ना हो तो उसे तुरंत पीठ की तरफ से लेटने के लिए बोलें.

Tips For Car Sickness In Children: अक्‍सर बच्‍चों में यह समस्‍या देखने को मिलती है कि चलती गाड़ी में ट्रैवल करने पर वे असहज महसूस करने लगते हैं और वोमिटिंग टेंडेंसी शुरू हो जाती है. ऐसे में वे या तो ट्रैवल नहीं करना चाहते या ट्रैवल को एन्‍जॉय नहीं कर पाते. लेकिन माता-पिता को समझ नहीं आता कि इस समस्‍या से बच्‍चों को किस तरह बचाया जाए. वह इस समस्‍या को दूर करने के लिए डॉक्‍टर के पास भी जाते हैं लेकिन इसका कोई मेडिकल इलाज नहीं होता. हम यहां बताते हैं कि मोशन सिकनेस क्‍यों होता है और बचाव के उपाय क्‍या हैं.

कार सिकनेस या मोशन सिकनेस क्‍या है
मायोक्‍लीनिक
के मुताबिक, इसे मोशन सिकनेस या कार सिकनेस के नाम से भी जाना जाता है. मोशन सिकनेस की समस्‍या तब शुरू होती है जब दिमाग को आंतरिक कान, आंख, ज्‍वाइंट और मांसपेशियों की नसों से परस्पर गलत जानकारियां मिलती हैं. कल्पना कीजिए कि एक छोटा बच्चा कार की पिछली सीट पर खिड़की से बाहर देख रहा है जिसकी सीट काफी नीचे है या कोई बच्‍चा कार में किताब पढ़ रहा है. ऐसे में बच्चे के आंतरिक कान को गति का एहसास तो होगा, लेकिन उसकी आंखें और शरीर को नहीं. जिस वजह से पेट अपसेट होना, ठंडा पसीना आना, थकान, भूख न लगना या उल्टी होने जैसी समस्‍या महसूस होने लगती है. हालांकि यह कुछ बच्‍चों में ही क्‍यों होता है इसकी जानकारी स्‍पष्‍ट नहीं है. यह समस्या 2 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों में अधिक देखने को मिलती है.

ये है कार सिकनेस को रोकने का तरीका
-बच्‍चों को कहें कि ट्रैवल के दौरान वे किताब या मोबाइल देखने की बजाय बाहर की तरफ देखें. ऐसा करने से समस्‍या कम होगी. बेहतर होगा कि वे ट्रैवल के दौरान सो जाएं.

-ट्रैवल से तुरंत पहले बच्‍चों को बहुत अधिक ना खिलाएं. अगर लंबा सफर है तो उन्‍हें कम मात्रा में हल्‍का फूड दें. मसलन, ड्राई क्रैकर्स या कुछ पीने की चीज.

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-कार में पर्याप्‍त हवा की व्‍यवस्‍था पर ध्‍यान दें. बंद या सफोकेशन वाली जगह पर सिकनेस ट्रिगर का काम करता है.

-यात्रा के दौरान आप बच्‍चों के माइंड को डिस्‍ट्रैक्‍ट करने का प्रयास करें. मसलन, बात करें, गाना बजाएं या गाना गाएं. ऐसा करने से वे बेहतर महसूस करेंगे.

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-अगर फिर भी बच्‍चे को ट्रैवल में परेशानी होती है तो आप बच्‍चे के डॉक्‍टर से संपर्क करें. आप उन्‍हें ओवर द काउंटर मेडिसीन के लिए पूछ सकते हैं.

-साथ में जिंजर कैंडी कैरी करें और जरूरत पड़ने पर उन्‍हें मुंह में रखने दें. गहरी सांस लेने कहें इससे तुरंत आराम मिलता है. मिंट और लिवेंटर की खुशबू भी उल्‍टी रोकने में मदद कर सकता है.

-अगर आपके बच्‍चे को मोशन सिकनेस महसूस हो रहा है तो तुरंत गाड़ी रोकें और बाहर वॉक करने के लिए कहें. उतरना संभव ना हो तो उसे तुरंत पीठ नीचे करते हुए लेटने के लिए बोलें. सिर पर गीला रुमाल या तौलिया रखें.  इस तरह बच्‍चा बेहतर महसूस करेगा.

Tags: Kids, Lifestyle, Parenting tips, Travel

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