यह अचार है बेहद खास, स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना, मोटापा समेत कई रोगों में रामबाण

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सनन्दन उपाध्याय/बलिया: अगर खाने के समय में अच्छा अचार मिल जाए तो स्वाद में चार चांद लगा जाता है. आज हम एक ऐसे ही अचार के बारे में बात करेंगे जो न केवल भोजन के स्वाद में चार चांद लगाता है बल्कि उससे कहीं ज्यादा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है. जी हां हम बात कर रहे हैं आंवले के अचार की. आंवला एक ऐसा फल है जिसके पेड़ की भी पूजा होती है. इसका आयुर्वेद में एक नहीं बल्कि तमाम प्रयोग बताए गए हैं. वह भी ठंडी के मौसम में अगर खाना खाने के समय आंवले का अचार मिल जाए तो आनंद ही कुछ और है.

दुकानदार एस.पी गुप्ता बताते हैं कि ठंडी के मौसम में इस अचार की बिक्री बढ़ जाती है क्योंकि ठंडी में होने वाली आम बीमारियों में काफी लाभकारी होता है और इसका स्वाद भी बहुत लाजवाब होता है. वही डॉ. प्रियंका सिंह बताती हैं कि यह पेट से संबंधित कोई भी रोग, सर्दी, खांसी, जुकाम और मोटापा जैसे तमाम रोगों में रामबाण का काम करता है.

ऐसे बनता है यह स्वादिष्ट अचार, ये कीमत

दुकानदार एस.पी गुप्ता ने कहा कि आंवले के अचार बनाने को तैयार करने के लिए सबसे पहले आंवले को उबाला जाता है और उसमें अजवाइन, मंगरैला, हींग काली मिर्च, जीरा, खटाई और गर्म सरसों का तेल डालकर खूब मिलाया जाता है. यह आचार एक दिन में तैयार होता है. दूसरे दिन से खाने योग्य बन जाता है. ठंडी में इसका मांग बढ़ जाता है क्योंकि ठंडी में होने वाली आम बीमारियों जैसे सर्दी, खांसी और जुकाम इत्यादि में अच्छा काम करता है. यह आचार 240 रुपए प्रति किलो एवं 60 रुपए पाव के हिसाब से ग्राहकों को दी जाती है.

ये है एक्सपर्ट की राय

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह बताती हैं कि आंवले का अचार काफी लाभकारी होता है. इसका प्रयोग एक नहीं बल्कि कई रूप में किया जाता है. आयुर्वेद में इसका काफी और महत्वपूर्ण प्रयोग हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और पाचन तंत्र में बेहद लाभ मिलता है. इसके सेवन से सर्दी, खांसी और जुकाम में राहत मिलती है तो वहीं अपच, गैस और पेट दर्द की समस्या भी दूर हो जाती है. इसका सेवन बहुत ज्यादा नहीं करना चाहिए. अगर आयुर्वेद चिकित्सक की राय लेकर इसका सेवन किया जाए तो यह अमृत के समान काम करेगा.

ये है लोकेशन

बलिया में मशहूर एस.पी गुप्ता अचार एवं मुरब्बा की दुकान है. जहां पर यह खास मुरब्बा मिलता है. सबसे प्राचीन दुकान ओक्डेनगंज पुलिस चौकी के पास में है. इसके तीन शाखा भी है. एक जगदीशपुर में दूसरी नगर पालिका गेट के ठीक सामने तीसरी दुकान कचहरी में अंबेडकर भवन के ठीक सामने स्थापित है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और हेल्थ बेनिफिट रेसिपी की सलाह, हमारे एक्सपर्ट्स से की गई चर्चा के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, न कि व्यक्तिगत सलाह. हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग हैं, इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही, कोई चीज उपयोग करें. कृपया ध्यान दें, Local-18 की टीम किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगी.

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