आशुतोष तिवारी/ रीवा: जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले भर से 1 महीने में तकरीबन 300 से 350 हार्ट के पेशेंट अस्पताल में पहुंचते हैं. वहीं तकरीबन 25 से 30 व्यक्तियों की हार्ट अटैक से मौत हो रही है.वहीं देश की बात की जाए तो भारत में हार्ट अटैक से मरने वालों में 10 में से 4 की उम्र 45 साल से कम है.10 साल में भारत में हार्ट अटैक से होने वाली मौतें करीब 75% तक बढ़ गई हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि हृदय रोग के लक्षण क्या है. और यदि किसी व्यक्ति को माइनर हार्ट अटैक आ जाए तो उसे अपनी जिंदगी को बचाने के लिए क्या प्रयास करना चाहिए. इस विषय पर जब हमने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रीवा में पदस्थ मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एस. के. त्रिपाठी से बात की तो उन्होंने बताया कि आज के समय में युवाओं में ह्रदय रोग के सिम्टम्स को पहचान थोड़ा मुश्किल है.
कैसे पहचाने हार्ट अटैक है या नहीं
डॉक्टर एस के त्रिपाठी ने कहा कि हार्ट अटैक में जो दर्द होता है वो बहुत तेज होता है. ऐसा नहीं है दर्द केवल एक प्वाइंट में होता है. बल्कि ये दर्द पूरे सीने में होता है. अधिकतर बाए सीने में और हाथ में ज्यादा दर्द होता है. यह दर्द जबड़ों तक आता है.दर्द के साथ तेज पसीना आता है और घबराहट भी होती है. कभी-कभी पूरे सीने में भी दर्द होता है. ऐसा दर्द अगर होता है और साथ में जोर की घबराहट भी होती है. तो पेशेंट को बिना समय गवाएं फौरन डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए .प्रयास ये करना चाहिए की ऐसे हॉस्पिटल में पहुंचे जहां कार्डियो का पूरा सेटअप हो. जहां आपके नस को तुरंत खोलने की व्यवस्था हो. डॉक्टर ने बताया कि दवाओं के माध्यम से भी नसों को खोला जा सकता है लेकिन कुछ में एंजियोप्लास्टी करना पड़ता है.
हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए
डॉक्टर एस के त्रिपाठी बताया कि दस परसेंट तो ऐसे केस होते है जिसमें हॉस्पिटल तक नहीं पहुंचा जा सकता है. अचानक कार्डियक अरेस्ट आता है और संभावना यह रहती है कि जल्द ही पेशेंट की डेथ भी हो जाए. ऐसे में पेशेंट की जान को बचाने के लिए CPR (cardiopulmonary resuscitation) आना चाहिए. जिसमे एक मिनट में तकरीबन 90 से 100 बार सीने के ऊपरी भाग में तेज तेज दबाना चाहिए. ऐसा करते हुए आप पेशेंट को हॉस्पिटल ला सकते है.
हार्ट अटैक का खतरा होने पर इन दवाओं को घर पर रखे
कई बार ऐसा होता है कि हमे पता होता है कि इस पेशेंट को हार्ट अटैक का रिस्क है. उन पेशेंट को ये सुझाव देना चाहिए कि वो एस्पिरिन,क्लोपिदोग्रेल, एटोरवास्टेटिन जैसे दवाओं को अपने घर में अपने पास रखे. जिससे कभी भी अगर ह्रदय घात के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत ऐसी दवाइयां लेकर हॉस्पिटल तक पहुंचा जा सके. लेकिन हम ये कहें की देश के सभी लोग ऐसे दवाइयां रख कर चले तो ये संभव नहीं है. लेकिन हमे जानकारी होनी चाहिए और हमे क्या एक्शन लेना चाहिए ये भी पता होना चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : December 19, 2023, 24:12 IST





