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अच्छी पहल! बच्चों को डिप्रेशन से बचाएगा एंगर जोन, बिहार में यहां हुई शुरूआत, एक्सपर्ट ने दी ये टिप्स

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सत्यम कुमार/भागलपुर. डिप्रेशन का शिकार आज के समय में छोटे बच्चे भी हो रहे हैं. इसके बाद वह कई आत्मघाती कमद उठा लेते हैं. इससे बचाने के लिए भागलपुर के एक स्कूल में एंगर जोन बनाया गया है. इसमें डिप्रेश्ड हुए बच्चों का समुचित इलाज होगा. शहर के डीएवी स्कूल में एंगर जोन का गठन किया गया है. प्राचार्य रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि एंगर जोन में वैसे बच्चों को बुलाया जाता है जो लड़ाई करते हैं या डिप्रेश्ड हो जाते हैं.

डीएवी के प्राचार्य रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि कई बार बच्चे एक दूसरे को चिढ़ा देते हैं. जिससे आपसी विवाद हो जाता है. पढ़ाई का प्रेशर हो या किसी अन्य चीजों को लेकर भी बच्चे डिप्रेस्ड हो जाते हैं. इन सभी चीजों से बचाव को लेकर हम लोगों ने एंगर जोन बनाया है. एंगर जोन में वैसे बच्चों को बुलाया जाता है जो लड़ाई करते हैं या डिप्रेशन में रहते हैं. वहां पर सारी सुविधाएं होती है. अलग से शिक्षक को बुलाकर उनसे सही बर्ताव से बातचीत की जाती है. जिससे रीजन का पता लगाया जाता है कि आखिर क्या हुआ. क्यों बच्चे डिप्रेस्ड हुए. इन सबको पता लगाने के बाद उसे समझा कर और उसे उस क्षण से निकाला जाता है. जिससे बच्चों में पहले वाली ऊर्जा आ जाती है.

बच्चों को न करें किसी भी चीज के लिए फोर्स

प्रचार्य की माने तो बच्चों को कभी भी किसी चीज के लिए फोर्स नहीं करना चाहिए. जिससे आपके बच्चे पर खतरा हो. हाल ही में कोटा में कई आत्महत्या जैसे केस सामने आए. जब इसको लेकर बात की गई तो उन्होंने बताया कि क्या होता है बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर बनने की इच्छा नहीं होती है. लेकिन माता-पिता के इक्छा की वजह से वह उस विषय को चूज कर लेते हैं. बाद में कई बार जब उस विषय में क्रॉस लगता है, तो वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. माता-पिता को यह समझना होगा कि हमारे बच्चे किस लायक है. तभी जाकर बच्चों का भविष्य तय हो पाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरीके से मशीन में कैपेसिटी होती है वह उतना ही लोड लें पाती है. अगर उससे अधिक हम उस पर भार देते हैं तो वह खराब हो जाता है. या ब्लास्ट कर जाता है. इस तरीके से हमारा ब्रांड भी काम करता है. अगर आप हद से ज्यादा उस पर प्रेशर देंगे तो फिर आपको हानि ही होगी. लेकिन इन सब का बचाव एंगर जॉन है. बच्चों को तुरंत वहां लाया जाता है और उनसे सारी बातें की जाती है और उन्हें समझाया जाता है.

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FIRST PUBLISHED : November 21, 2023, 16:38 IST

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Gypsy News
Author: Gypsy News

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