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Gaganyaan mission: समुद्र में मिला गगनयान का क्रू मॉड्यूल…ISRO चीफ ने दी खुशखबरी, जानें टेस्टिंग के बाद क्‍या बोले?

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नई दिल्‍ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्‍यक्ष एस सोमनाथ ने शनिवार को गगनयान मिशन से जुड़े ट्रायल को लेकर एक खुशखबरी दी. इसरो चीफ ने कहा कि क्रू मॉड्यूल को समुद्र से पूरी तरह से बरामद कर लिया गया है. कोई गलती नहीं हुई है. सभी डेटा सही लग रहे हैं. इसरो की योजना गगनयान मिशन के माध्‍यम से पहली बार मानव को अंतरिक्ष में भेजने की है. अगले साल यह मिशन लॉन्‍च होगा. इसे लेकर फिलहाल टेस्टिंग का दौर जारी है. इसी कड़ी में आज पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल (CM) और क्रू एस्‍केप सिस्‍टम (CES)की टेस्टिंग हुई. बंगाल की खाड़ी में दोनों मॉड्यूल को सही और सटीक तरीके से गिराने में सफल होने पर इसरो के वैज्ञानिक खुश हैं.

इसरो चीफ एस सोमनाथ ने इसे लेकर कहा कि मिशन -20 परीक्षणों की एक सीरीज की जानी है. आज हुआ परीक्षण क्रू एस्केप सिस्टम के लिए था. क्रू मॉड्यूल वो स्थान है, जहां गगनयान मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में दबावयुक्त पृथ्वी जैसे माहौल के बीच रखा जाएगा. ट्रायल सफल होने पर इसरो चीफ एस सोमनाथ शनिवार शाम को मीडिया के बीच आए और बताया कि समुद्र से क्रू मॉड्यूल को पूरी तरह से रिकवर कर लिया गया है.

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क्‍या कुछ बोले इसरो चीफ?
टीवी-डी1के लिए क्रू मॉड्यूल एक बिना दबाव वाला संस्करण था. एस. सोमनाथ ने कहा, ‘मुझे टीवी-डी1 मिशन की सफलता की घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है. मिशन का उद्देश्य एक परीक्षण यान प्रदर्शन के माध्यम से गगनयान मिशन के लिए चालक दल बचाव प्रणाली का प्रदर्शन करना है. इस दौरान यान एक ‘मैक’ और उससे भी अधिक तेजी से ऊपर गया. यह ध्वनि की गति है. मिशन फेल होने की स्थिति में सीईएस की कार्यप्रणाली को दर्शाया गया.’

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क्‍या है गगनयान मिशन का मकसद?
इसरो की योजना गगनयान मिशन के माध्‍यम से पहली बार तीन दिन के लिए वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की सबसे निचली कक्षा यानी पृथ्‍वी से करीब 400 किलोमीटर की दूर पर भेजना है. तीन दिन बाद सभी यात्री वापस सुरक्षित जमीन पर लौट आएंगे. अगर इसरो इस मिशन में कामयाब हो जाता है तो भविष्‍य में इस दिशा में कई नए रास्‍ते खुल जाएंगे. इसके बाद इसरो भविष्‍य में अपने दम पर अंतरिक्ष स्‍टेशन बनाने योजना पर भी काम करेगा.

Tags: Gaganyaan mission, ISRO, Space news

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Author: Gypsy News

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