हाइलाइट्स
वर्षों बाद नक्सल प्रभावित गांव में बहने लगी शिक्षा का बयार.
नक्सलियों ने विस्फोट कर उड़ा दिया था गांव का स्कूल भवन.
गांव के छठी पास युवक शिक्षा में बच्चों को पहुंचा रहा मदद.
वर्तमान में सामुदायिक भवन में ही चल रहा है गांव का स्कूल.
जमुई. जिले का वह इलाका जो जंगलों पहाड़ों से घिरा होने के कारण जहां बीते कई दशक से नक्सलियों का खौफ था. जहां लोग शिक्षा से दूर थे, वहां अब माहौल बदलने लगा है. बच्चे अब हाथ में कॉपी कलम और स्लेट लेकर पढ़ाई करने लगे हैं. यह सब कुछ संभव तब हुआ जब सुरक्षा बलों की पहुंच उसे इलाके में हुई, जिसे नक्सलियों का मांद कहा जाता था. जमुई जिले के बरहट इलाके के चौरमारा में जब सुरक्षा बलों का स्थाई कैंप हो गया तो उसका असर अति नक्सल प्रभावित गांव गुरमाहा में भी देखने को मिलने लगा है.
दरअसल, गांव के स्कूली बच्चे जो बीते कई वर्षों से शिक्षा से दूर थे, नक्सलियों ने स्कूल भवन को उड़ा दिया था, जिसके बाद वहां पढ़ना संभव नहीं होता था. नक्सलियों के खौफ के कारण ये शिक्षक पहले स्कूल नहीं जा पाते थे जिसका असर गांव में शिक्षा पर भी पड़ा. लेकिन, जब स्थिति सामान्य हुई शिक्षक स्कूल जाने लगे लेकिन स्थानीय स्तर पर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कोई प्रेरित नहीं करता था. ऐसे में गांव का ही एक युवक सनोज जो छठी पास है, वह नक्सल प्रभावित गुरमाहा गांव के बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहा है.
सनोज ने सबसे पहले गांव के बच्चों को और उनके घर वालों को शिक्षा के महत्व को समझाया. इसी क्रम में सामुदायिक भवन में चलने वाले स्कूल में बच्चों को आने के लिए प्रेरित किया. 20 साल का यह युवक इन दिनों गांव के पहली से पांचवीं क्लास के 87 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देता है. सनोज की क्लास गांव के ही एक सामुदायिक भवन में लगती है, जहां घरों से निकलकर बच्चे वहां पहुंचते हैं और सनोज उन्हें शिक्षा का ज्ञान देता है. स्कूल में तैनात शिक्षक के आने के पहले और जाने के बाद सनोज बच्चों को पढ़ाता है.
नक्सलियों ने विस्फोटक से उड़ा दिया था स्कूल
सनोज आदिवासी समाज से आता है और गुरमाहा में रहने वाले सभी लोग आदिवासी समाज के ही है, जहां मतदाताओं की संख्या लगभग ढाई सौ है. बरहट प्रखंड के शिक्षा पदाधिकारी आनंदी हरिजन ने बताया कि गुरमाहा के स्कूल भवन को नक्सलियों ने डेढ़ दशक पहले विस्फोटक को उड़ा दिया था. हालांकि, स्कूल में अरुण कुमार दिवाकर और मनमोहन सावरी नाम के दो शिक्षक तैनात हैं.
गुरमाहा गांव में स्कूल नहीं जा पाते थे दलित बच्चे
इस बीच नक्सलमुक्त होते इलाके में सरकारी गतिविधियां शुरू हुईं तो 6 महीना पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम गुरमाहा जाकर लोगों के मेडिकल जांच के लिए कैंप लगाया था. यहां के स्वास्थ्य प्रबंधक ने बच्चों को मिलने वाली शिक्षा को लेकर चर्चा की थी, तब पता चला कि गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में आज भी दो शिक्षक तैनात हैं, लेकिन स्कूल भवन नहीं है. बच्चे स्कूल नहीं जाते और उनकी पढ़ाई नहीं हो पाती.
सरकारी अधिकारी की पहल से सुलभ हुई राह
इसकी जानकारी होने पर बरहट प्रखंड के स्वास्थ्य प्रबंधक महेंद्र प्रसाद ने गांव के पढ़े लिखे सनोज कुमार नाम के युवक को यह जिम्मेदारी दी और फिर बच्चों के बीच कॉपी किताब कलम मुहैया कराई गई. तब से सामुदायिक भवन में बच्चों की पढ़ाई शुरू हो गई. सनोज हर दिन बच्चों को शिक्षा देता है. सनोज के पढ़ाए हुए पाठ को बच्चे खूब याद भी करते हैं और अब इस गांव में किताबों में लिखी कविता की गूंज सुनाई देती है. स्थानीय स्तर पर सनोज कुमार नाम का एक युवक गांव में बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा है. सनोज सामुदायिक भवन में चलने वाले क्लास में बच्चों को पढ़ता भी है इसकी पहल से गांव के बच्चे शिक्षा से जुड़े हैं जो काफी प्रशंसनीय है.
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Tags: Positive Story
FIRST PUBLISHED : October 21, 2023, 10:01 IST





