नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मामलों के निपटारे में देरी पर न केवल चिंता जाहिर की है, बल्कि नाराजगी भी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर कानूनी प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ती है तो वादियों का न्यायिक प्रणाली से मोहभंग हो सकता है. इसने यह भी कहा कि पुराने मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटान सुनिश्चित करने के लिए सभी हाईकोर्ट को निर्देश जारी किए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की बेंच ने लंबित मामलों पर राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के देशव्यापी आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए बार और बेंच के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है.
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कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 50 साल से अधिक समय से लंबित कुछ पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा, ‘कानूनी प्रक्रिया धीमी गति से चलने पर याचिका दाखिल करने वालों का मोहभंग हो सकता है. हमने अपनी पीड़ा व्यक्त की है, जहां एनजेडीजी के अनुसार कुछ मुकदमे 65 साल से अधिक समय से लंबित हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर यह देरी जारी रहेगी तो वादी न्यायिक प्रणाली में भरोसा खो देंगे. याचिकाकर्ताओं को बार-बार स्टे की मांग को लेकर सतर्क रहना चाहिए. उन्हें पीठासीन अधिकारियों की अच्छाई को अपनी कमजोरी के रूप में नहीं लेना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों से निपटने के लिए 11 निर्देश जारी किए. कोर्ट ने कहा कि पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों की निगरानी संबंधित हाई कोर्ट द्वारा किए जाने की आवश्यकता है.
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FIRST PUBLISHED : October 20, 2023, 20:08 IST





