जब लोकोपायलट का रोजाना फिक्‍स रूट होता है तो उसे क्‍यों दिया जाता है रूट प्‍लान? आप भी जानें वजह

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नई दिल्‍ली. ट्रेन को चलाने वाला लोकोपायलट रोजाना एक ही रूट पर चलता है. उसे एक एक स्‍टेशन और क्रासिंग सभी कुछ याद रहता है, इसके बावजूद इंजन पर बैठने से पूर्व उसे रूट प्‍लान दिया जाता है. इसी तरह का प्‍लान फ्लाइट पायलट को भी दिया जाता है, पायलट इसी के अनुसार ही फ्लाइट उड़ाता है. हालां‍कि ट्रेन और फ्लाइटस में बहुत अंतर है. आखिर क्‍या वजह है कि लोकोपायलट को रूट प्‍लान दिया जाता है.

रेलवे बोर्ड के रिटायर मेंबर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रदीप कुमार बताते हैं कि भले ही लोकोपायलट कई वर्षों से एक ही रूट पर चल रहा है. लेकिन रेलवे किसी तरह की भूल की गुंजाइश नहीं रखना चाहता है. पायलट को ड्यूटी संभालने के साथ रूट प्‍लान सौंपा जाता है. जिसमें स्‍पष्‍ट होता है कि किस जगह ट्रेन की स्‍पीड कितनी रखनी होगी, किस स्‍टेशन में कितनी देर का ठहराव होगा. कहां-कहां पर कर्व पड़ेंगे और वहां कितनी स्‍पीड रखनी होगी. रूट पर कहां-कहां शहर पड़ेंगे और वहां पर स्‍पीड क्‍या होगी. इस तरह के जरूरी निर्देशों के साथ रूट प्‍लान दिया जाता है. इस रूट प्‍लान के अनुसार लोकोपायलट ट्रेन चलाता है.
फ्लाइट पायलट को इसलिए दिया जाता है.

फ्लाइट आसमान में उड़ता है और वहां में जाने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) से किसी तरह का संकेत नहीं मिलता है. सफर के दौरान कई जगह मौसम खराब हो सकता है, तेज हवाएं चल सकती हैं, एयर टर्बुलेंस आ सकता है. उसी के अनुसार पायलट को पहले से तैयार रहने और यात्रियों को अलर्ट करने के लिए रूट प्‍लान दिया जाता है.

Tags: Business news, Indian railway, Indian Railways

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