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क्या किसी राजनीतिक दल को आपराधिक केस में आरोपी बनाया जा सकता है? जानें क्यों शुरू हुई यह बहस

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नई दिल्ली: क्या किसी राजनीतिक पार्टी को आपराधिक केस में आरोपी बनाया जा सकता है? यह सवाल आज इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि दिल्ली शराब घोटाला केस में मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक टिप्पणी की है. दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा था कि अगर अपराध की रकम राजनीतिक दल को मिली तो उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया? इस पर ईडी की ओर से कहा गया कि आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाने पर विचार जारी है. अब सवाल उठता है कि अगर दिल्ली शराब घोटाला केस आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाया गया तो क्या होगा, क्या राजनीतिक दल को आपराधिक केस में आरोपी बनाया जा सकता है?

इस सवाल का जवाब तलाशने पर बहुत कुछ स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है. कानूनी जानकारों के मुताबिक यह एक बहस का विषय है, क्योंकि आजतक किसी भी राजनीतिक पार्टी को आपराधाकि केस में आरोपी नहीं बनाया गया है. इसकी वजह यह है कि अभी तक कानून के मुताबिक राजनीतिक पार्टी कोई ज्यूरिस्टिक विषय यानी कानूनी व्यक्ति नहीं है. वो ना किसी पर केस कर सकती है और न उस पर कोई केस हो सकता है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी अब तक कोई फैसला नहीं है.

…तो आम आदमी पार्टी को पक्षकार क्यों नहीं बनाया? मनीष सिसोदिया की जमानत पर जब सुप्रीम कोर्ट ने ED से पूछा सवाल

हालांकि, कानून जानकारों का कहना है कि 2017 का छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला है, जिसमें कहा गया था कि राजनीतिक पार्टी ज्यूरिस्टिक यानी कानूनी व्यक्ति नहीं है. राजनीतिक पार्टी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29(ए) के तहत पंजीकृत होती है. वो किसी कंपनी की तरह कंपनी कानून से शासित नहीं होती है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में दोषी करार होने पर सदन के सदस्य की सदस्यता रद्द करने का प्रावधान है, मगर किसी पार्टी के खिलाफ आपराधिक केस में कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं है.

क्या किसी राजनीतिक दल को आपराधिक केस में आरोपी बनाया जा सकता है? जानें क्यों शुरू हुई यह बहस

जानें सुप्रीम कोर्ट में मनीष सिसोदिया की जमानत पर क्या हुआ था
दरअसल, मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर बहस के दौरान बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी ईडी से पूछा था कि जांच एजेंसी का आरोप है कि रिश्वत का पैसा मनीष सिसोदिया के राजनीतिक दल तक पहुंचा, मगर अब तक राजनीतिक दल को तो आरोपी नहीं बनाया गया है. ईडी ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी को करीब 100 करोड़ रुपए की रिश्वत मिली थी. बता दें कि दिल्ली शराब घोटाला केस में अब तक ईडी ने मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को गिरफ्तार किया है. शराब घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रही हैं.

Tags: Manish sisodia, Manish sisodia case, Supreme Court

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Author: Gypsy News

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