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ट्रूडो के करीबी के निज्जर लिंक का खुलासा, खुफिया रिपोर्ट में दावा- ISI के साथ रची भारत पर आरोप की साजिश

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हाइलाइट्स

ट्रूडो के करीबी सांसद सुख धालीवाल के खालिस्तानी आतंकी निज्जर से करीबी संबंध थे.
प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स का सरगना निज्जर नो-फ्लाई लिस्ट में था.
निज्जर धालीवाल की संसदीय सीट के एक गुरुद्वारे में रहता था.

नई दिल्ली. कुछ भारतीय खुफिया इनपुट हैं, जो कनाडा के सांसद और जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) के करीबी सहयोगी सुख धालीवाल (Sukh Dhaliwal) के कनाडा में अपना नेटवर्क कायम करने में मृत खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) को दिए गए कथित समर्थन की ओर इशारा करते हैं. खुफिया सूत्रों के मुताबिक प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का सरगना निज्जर नो-फ्लाई लिस्ट में था, लेकिन धालीवाल कनाडा में उसके स्थायी निवास की व्यवस्था करने में कामयाब रहा. गौरतलब है कि धालीवाल को इमीग्रेशन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है. सूत्रों के मुताबिक यह इनाम उन्हें उनके सिखों के बीच बड़े समर्थन आधार और आईएसआई से उनकी निकटता के लिए मिला है.

हरदीप सिंह निज्जर सरे के धालीवाल की संसदीय सीट के एक गुरुद्वारे में रह रहा था, जहां 18 जून को दिनदहाड़े हमलावरों ने उसे गोली मार दी थी. खुफिया सूत्रों का कहना है कि निज्जर एक इमिग्रेशन रैकेट चला रहा था, जिसमें लोगों को कनाडा लाया जाता था और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल किया जाता था. निज्जर को कथित तौर पर धालीवाल का समर्थन हासिल था. इस रैकेट के जरिये हासिल किया गया पैसा दोनों के बीच बांट दिया जाता था. सूत्रों का कहना है कि धालीवाल के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और निज्जर के साथ लिंक साफ तौर से दिखाई दे रहे हैं.

लगभग 4 महीने पहले लाहौर की यात्रा के दौरान लिबरल पार्टी के सांसद सुख धालीवाल के पोस्टर हर जगह लगे थे. उनका भव्य स्वागत किया गया. यहीं पर धालीवाल और ट्रूडो दोनों की घटती रैंकिंग को बढ़ावा देने की साजिश रची गई थी. न्यूज18 पहले ही बता चुका है कि निज्जर विवाद के पीछे धालीवाल ही मास्टरमाइंड था. जब ट्रूडो पाकिस्तान से लौटे तो धालीवाल ने उन्हें यह विचार दिया और उन्होंने खालिस्तानियों की सहानुभूति हासिल करने के लिए निज्जर की मौत का इस्तेमाल करने का फैसला किया. यह पहली बार नहीं है जब धालीवाल का नाम भारत विरोधी रुख के सिलसिले में सामने आया है. 2010 में लिबरल सांसद धालीवाल और एंड्रयू कानिया ने हाउस ऑफ कॉमन्स में एक याचिका पेश की थी. जिसमें ओटावा से भारत में 1984 के सिख दंगों को नरसंहार का कार्य मानने के लिए कहा गया.

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इस महीने संसद में अपने अनुभव का खुलासा करते हुए धालीवाल ने कहा कि उन्हें भारत में ‘सिखों के खिलाफ ज्यादतियों’ के खिलाफ बोलने के लिए भारतीय वीजा देने से इनकार कर दिया गया था. उन्होंने कंजरवेटिव, लिबरल और एनडीपी सहित कनाडा के सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से कहा कि वे भारत सरकार के इस काम की निंदा करें. उन्हें एनडीपी के जगमीत सिंह का समर्थन हासिल था, जिन्होंने कहा था कि भारत ने उन्हें 2013 में वीजा देने से इनकार कर दिया था जब वह ओंटारियो के प्रांतीय असेंबली के सदस्य थे. सिंह ने कहा कि भारत सरकार नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की उनकी कोशिशों से असंतुष्ट दिखाई दी.

Tags: Justin Trudeau, Khalistan, Khalistan Tiger Force KTF, Khalistani Terrorists

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Gypsy News
Author: Gypsy News

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