भारतीय रेलवे ने देशभर में चलाया ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’, 1.5 लाख लोगों ने 9 दिनों में 5 लाख मानव-घंटे किए समर्पित

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नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे ने देश भर में स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान चलाया. इस दौरान 1.5 लाख लोगों ने केवल 9 दिनों में लगभग 5 लाख मानव-घंटे समर्पित किए. इस अभियान की शुरुआत 15 सितंबर को हुई जो आगामी 2 अक्टूबर तक जारी रहेगा. प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि स्वच्छ, अधिक साफ रेलवे प्रणाली की दिशा में काम किया जा रहा है,  जिसका उद्देश्य समग्र परिवर्तन लाना है. इस वर्ष के संस्करण में, स्टेशनों पर रेल पटरियों की सफाई, प्रमुख स्टेशनों की संपर्क सड़कों और रेल परिसर से प्लास्टिक कचरे को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है. यह सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है कि रेलवे नेटवर्क का हर कोना स्वच्छता और निर्वहनीयता के सिद्धांतों का पालन करे. इस अभियान में स्वच्छ संवाद, स्वच्छ रेलगाड़ी, स्वच्छ स्टेशन, स्वच्छ परिसर, स्वच्छ आहार और स्वच्छ पैंट्री शामिल है.

स्वच्छता ही सेवा अभियान के पहले नौ दिनों में, 15 से 24 सितंबर 2023 तक, 1.5 लाख से अधिक व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. इस दौरान अभियान के लिए सामूहिक रूप से 498,265 मानव-घंटे समर्पित किए गए. रेलवे की तरफ से कहा गया कि यह विशाल संख्या जिम्मेदारी और स्वामित्व की गहरी भावना को दर्शाती है, जो नागरिकों ने रेलवे को स्वच्छ और अधिक साफ बनाने के प्रति अपनाई है. रेलवे ने यात्रियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है.

रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर स्वच्छता ही सेवा लोगो और बैनर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है. रेलगाड़ियों और स्टेशनों पर यात्रियों को उचित वेस्‍ट मैनेजमेंट के बारे में शिक्षित करने के लिए घोषणाएं की जा रही हैं. अभियान के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए “स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत” नारे के तहत प्रभात फेरी, सुबह के जुलूस का आयोजन किया जाता है. इस अभियान की शुरुआत रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ द्वारा रेल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेल अधिकारियों को स्वच्छता शपथ दिलाने के साथ हुई. यह प्रतीकात्मक भाव इस उद्देश्य के प्रति रेलवे की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

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भारतीय रेल परिवर्तन के माध्यम के रूप में कला और संस्कृति का भी उपयोग कर रही है. रेलवे स्टेशनों पर गैर सरकारी संगठनों, धार्मिक निकायों और स्कूली बच्चों के सहयोग से नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाते हैं. ये रंग-बिरंगे और जानकारीपूर्ण प्रदर्शन यात्रियों को स्वच्छता और सफाई के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए आकर्षक मंच के रूप में काम करते हैं.

इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों, पटरियों, यार्डों या डिपो परिसरों के निकट के क्षेत्रों में खुले में शौच को हतोत्साहित करना है. सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान इस संदेश को प्रभावी ढंग से फैलाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है. पर्यावरण-मित्रता और निर्वहनीयता को बढ़ावा देने के प्रयास में, जैव-शौचालय के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने वाला स्वच्छता जागरूकता अभियान पूरे जोर-शोर से चलाया जा रहा है. यात्रियों को उनकी नागरिक जिम्मेदारियों की याद दिलाने के लिए गंदगी-विरोधी नोटिस और क्या करें/क्या न करें के पोस्टर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाते हैं.

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