रांची. इस वक्त झारखंड की राजधानी रांची से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कोर्ट से ईडी (ED) की टीम को मोहम्मद इज़हार अंसारी की 6 दिनों की रिमांड की अनुमति मिल गई है. दरअसल ईडी की टीम ने कोयला कारोबारी मोहम्मद इज़हार अंसारी को कोयला लिंकेज दुरुपयोग मामले में में गिरफ्तार किया था. मिली जानकारी के अनुसार ईडी ने कोयला लिंकेज दुरुपयोग मामले में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 16 जनवरी को ही मोहम्मद इज़हार अंसारी को गिरफ्तार किया है. बता दें, मोहम्मद इज़हार अंसारी का नाम पूजा सिंघल मामले में भी सामने आया था.
वहीं मोहम्मद इज़हार अंसारी को बुधवार 17 जनवरी को माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय, रांची के समक्ष पेश किया गया. इसके बाद न्यायालय ने बुधवार को ईडी की टीम को मोहम्मद इज़हार अंसारी से पूछताछ के लिए 6 दिनों की रिमांड की अनुमति दी है. दरअसल ईडी की टीम ने मंगलवार को मोहम्मद इज़हार अंसारी के हजारीबाग स्थित आवास और फैक्ट्री में रेड मारी थी. उनके खिलाफ कोयला लिंकेज मामले में 70 करोड़ की हेराफेरी का मामला सामने आया है.
बता दें, केन्द्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा झारखंड राज्य के हजारीबाग इलाके में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए इजहार अंसारी नाम के कोल कारोबारी को मंगलवार देर शाम को गिरफ्तार (ED arrested from Hazaribagh )कर लिया गया था. इसके साथ ही उसके आवास से करीब तेरह लाख रूपये की नगदी को भी जब्त किया गया है, जिसके बारे में पूछने पर आरोपी कोई सटीक जवाब आरोपी नहीं दे पा रहा था. जांच एजेंसी के सूत्र के मुताबिक गिरफ्तारी की जानकारी शाम करीब साढ़े सात बजे सामने आई है.
सूत्र के मुताबिक ये मामला झारखंड के कोल लिंकेज घोटाला मामला से जुड़ा हुआ है. इस मामले में रामगढ़ थाना इलाके में दर्ज मामले को आधार बनाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था, उसके बाद मंगलवार को रामगढ़ सहित कई अन्य लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. हालांकि इस आरोपी के खिलाफ ये पहली छापेमारी की कार्रवाई नहीं है. बल्कि पिछले साल तीन मार्च को 14 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन करने के बाद इसके पास से करीब तीन करोड़ 58 लाख रुपये जब्त किया गया था
जांच एजेंसी के वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक ये मामला झारखंड के खनन विभाग से जुड़ा हुआ है . दरअसल ये मामला कई ऐसे कंपनियों द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है जो राज्य सरकार से रियायती दर पर कोयले को खरीदकर उसे बेहद महंगे दामों पर प्राइवेट कंपनियों को बेच देते हैं जबकि नियम ये कहता है की जिस कंपनी के पास कोयले के प्रयोग से संबंधित फैक्ट्री -उद्योग धंधा होता है और अगर कानूनी प्रक्रिया के तहत आता है उसी कंपनी को राज्य सरकार रियायती दर पर कोयले को मुहैया करा सकता है . लेकिन खनन विभाग से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा प्राइवेट लोगों के साथ आपसी कनेक्शन के आधार पर उसकी खरीद -बिक्री की जाती है और राज्य सरकार सहित केन्द्र सरकार को करोड़ों रुपये का चूना पिछले कई सालों से हर महिने लगाया जा रहा है.
लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के कई इलाकों में छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई ऐसे कंपनियों के बारे में भी जानकारी मिली है जिसके पास कोयला से संबंधित कोई फैक्ट्री भी नहीं है. लेकिन सब्सिडी मूल्य पर यानी रियायती दर पर कोयले की खरीदारी किया जा रहा था और उसे ज्यादा मुनाफे में बेच दिया जाता था. इसके बदले में पिछले काफी समय से उन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी द्वारा लाखों -करोड़ों रुपये कमिशन के तौर पर उगाही किया जा रहा है. लिहाजा इस मामले में जांच एजेंसी को कई ऐसे लोगों की जानकारी मिली है , जिसके आधार पर यह तफ्तीश को आगे बढ़ाया जा रहा है. वहीं इस मामले में
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FIRST PUBLISHED : January 17, 2024, 16:31 IST





