अर्पित बड़कुल /दमोह.मध्यप्रदेश के दमोह जिले के ग्रामीण इलाके में मधुमक्खी पालन की शुरुआत हो चुकी है. पहली झलक कुआखेड़ा गांव में देखनों को मिली. मधुमक्खियों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है. एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिल रहा है कि सालों पुरानी बी-थेरेपी को लोग अपनाने लगे है.मधुमक्खियों का डंक इतना खतरनाक होता है कि अगर मधुमक्खी किसी इंसान को काट ले तो दर्द, बेचैनी के साथ गंभीर एलर्जी के अलावा मौत भी होने की संभावना होती है लेकिन आप ये जानकर हैरानी में पड़ जाएंगे कि मधुमक्खी का डंक भी कई बीमारियों का रामबाण इलाज है. जिससे हम एपेथेरेपी,बी-थेरेपी और बी-वैनम थेरेपी के नाम से भी जानते हैं.
मेडिकल साइंस में इसे अल्टरनेटिव थेरेपी के नाम से जाना जाता है जिसका चलन देश, विदेशों में काफी हद तक देखा जाता है. वही बुंदेलखंड के सागर और दमोह के ग्रामीण इलाकों में कई जगह हटा, बटियागढ़, पथरिया और सागर जिले के गढ़ाकोटा में इस पद्धति से इलाज किया जा रहा है.
300 पुरानी पद्धति से आज भी इलाज जारी
प्रमाणिकता के अनुसार यह चिकित्सा पद्धति करीब ढाई 300 साल पुरानी है. इस पद्धति में मधुमक्खी के डंक बी- वैनम को सीधा शरीर में इंजेक्ट करते हैं. इसके बाद ढंग से निकलने वाला जहर गठियावाद के इलाज में काफी कारगर है इससे घुटनो में दर्द,पीठ दर्द,माइग्रेन,साइटिका जैसी बीमारियों का रामबाण इलाज यह मधुमक्खी का डंक. इटारसी की रहने वाली राजकुमारी सराफ है इस थेरेपी से बहुत ज्यादा आराम है चलने के दौरान में पेर में बहुत ज्यादा तकलीफ होती थी लेकिन अब 90%तक आराम है कभी कभी लगता है कि दर्द हो रहा है कभी कभी लगता है कि दर्द है ही नहीं.
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FIRST PUBLISHED : November 22, 2023, 15:44 IST





