केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्राचीन काल से अबतक पुस्तकों का महत्त्व कम नहीं हुआ है. हम कितनी भी तकनीकी प्रगति कर लें लेकिन मुद्रित पुस्तकों का महत्त्व हमेशा बना रहेगा. मुद्रित पुस्तकें हमारे संस्कार और चरित्र निर्माण में सहायक तो होती ही हैं. वह हमारे अंदर सकारात्मक निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करती हैं. अर्जुन राम मेघवाल ने बातें साहित्य अकादमी के पुस्तक मेला ‘पुस्तकायन 2023’ के उद्घाटन समारोह में कहीं. उन्होंने साहित्य अकादमी पुस्तकालय में बच्चों के लिए नवनिर्मित चिल्ड्रन्स कॉर्नर का भी उद्घाटन किया.
साहित्य अकादमी परिसर में आयोजित पुस्तक मेला में अर्जुन राम मेघवाल ने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के पुस्तक प्रेम के कई उदाहरण देते हुए बताया कि पुस्तकों के कारण ही वे देश के लिए एक ऐसा संविधान बना पाए जो स्वतंत्रता से पहले समानता की बात करता है.
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि साहित्य अकादमी भारतीय भाषाओं का सबसे बड़ा प्रकाशनगृह है, जो भारतीय साहित्य के एकात्म को प्रदर्शित करता है. उन्होंने कहा कि ज्ञान आधारित समाज ही सर्वश्रेष्ठ होता है और उसका निर्माण पुस्तकों के सहारे ही संभव है. आज हम पाषाण युग से अंतरिक्ष तक किताबों के कारण ही पहुंच पाए हैं. उन्होंने अच्छे पाठक को भविष्य का लेखक मानते हुए कहा कि हमें नई पीढ़ी को पढ़ने के आनंद से परिचित कराना होगा तभी वे बेहतर भविष्य के लिए तैयार हो सकेंगे.
कार्यक्रम के आरंभ में साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित पुस्तकायन की सफलता को देखते हुए इस मेले के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया है. उन्होंने साहित्य अकादमी पुस्तकालय में बनाए गए चिल्ड्रन्स कॉर्नर के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चों के लिए विशेष तौर पर बनाया गया यह कॉर्नर उन्हें अपने बाल परिवेश में पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करेगा.
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव उमा नंदूरी, निदेशक प्रियंका चंद्रा तथा अनीश पी. राजन भी उपस्थित थे.
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FIRST PUBLISHED : December 1, 2023, 19:23 IST