आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण. भारत आयुर्वेद की भूमि है, यहां न जाने कितनी ऐसी जड़ी-बूटियां मिलती हैं, जिनके इस्तेमाल से बीमारियां दूर हो सकती हैं. इन्हीं जड़ी-बूटियों में एक है लौंग पीपर या पीपली. वैसे तो इसका इस्तेमाल मसालों के रूप में होता है, लेकिन इसके अन्य फायदों के बारे में बेहद कम लोग ही जानते हैं. यह भी कहा जाता है कि जितने भी गरम मसाले हैं, उनमें पिपली उत्तम है. वैद्यराज व मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन दीनानाथ उपाध्याय के अनुसार आयुर्वेद में तो पिपली को विशेष सम्मान प्राप्त है. साथ ही विज्ञान की आधुनिक खोजों ने भी माना है कि पिपली शरीर के लिए गुणों की खान है.
बता दें कि पीपली के पौधे में बारिश के मौसम में फूल खिलते हैं और ठंड का मौसम आते ही फल निकल आते हैं. इसके फलों को ही पीपली कहते हैं. खास बात यह है कि बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले में इसकी उपज बेहद आसानी से हो जाती है. या फिर यूं कहें, तो चंपारण के जंगली क्षेत्रों में ये आपरूपी ही फल आते हैं. पतंजलि के आयुर्वेदाचार्य भुवनेश की माने तो, इसका सेवन अगर उचित मात्रा में किया जाए तो यह सेहत को कई तरीके से फायदा पहुंचा सकता है. हालांकि, अधिक सेवन करने से नुकसान भी होते हैं. अंतर्राष्ट्रीय एमजोन जैसे ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर यह 5200 रुपए प्रति केजी तक बिकती है.
आयुर्वेद में विशेष महत्व
जानकारों के अनुसार, इसके उपयोग से ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा कंट्रोल में रहती है, तो इसे लिवर के लिए भी बेहद लाभकारी भी माना जाता है. यह मौसम विशेष में शरीर को जीवाणुओं (Bacteria) से भी बचाती है. देश विदेश में पिपली को वही सम्मान प्राप्त है, जो काली मिर्च को है. तीखेपन में पिपली थोड़ी कम होती है, लेकिन खाते वक्त यह मुंह में अधिक लार पैदा करती है. 7वीं-8वीं ईसा पूर्व लिखे गए भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ में पिपली का वर्णन है. इसे मधुर, कफवर्धक, स्निग्ध व गरम बताया गया है. अन्य प्राचीन ग्रंथ ‘सुश्रुतसंहिता’ में कुछ ऐसे आहार बताए गए हैं, जिनमें पिपली का इस्तेमाल किया जाता है.
दर्जनों बीमारियों में लाभकारी
भारत की एग्मार्क लेब के संस्थापक निदेशक जीवन सिंह प्रुथी ने अपनी पुस्तक ‘Spcices And Condiments’ में जानकारी दी है कि भारत में अधिकांश पिपली जंगली पौधों से प्राप्त होती है. इसके पौधे बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, चेरापूंजी आदि इलाकों में खूब उगते हैं. अगर शरीर में कुछ विषैला पदार्थ पहुंच गया है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है, तो पिपली उस पदार्थ को न्यूट्रल कर देती है. इसके अलावा कफ, जुखाम, खांसी, बुखार, गले की खराबी, सांसों से संबंधित समस्या, अनिद्रा, कोलेस्ट्रॉल, उल्टी, हिचकी, दस्त आदि बीमारियों में चिकित्सक की सलाह के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : November 5, 2023, 13:44 IST





