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ED का बड़ा खुलासा, आरोपी ने कबूला- गिरफ्तार मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने उठाया फायदा – News18 हिंदी

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हाइलाइट्स

पश्चिम बंगाल राशन घोटाला के आरोपी बकीबुर रहमान की तीन शेल कंपनियों का पता चला.
जिसमें डमी डायरेक्टर थे और उनके जरिये राशन की खरीद फरोख्त हो रही थी.
रहमान ने बताया कि पैसा कर्ज के रूप में फूड एंड सप्लाई मंत्री ज्योतिप्रिय माल्लिक को जा रहा था.

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल राशन घोटाला की जांच कर रही सेंट्रल एजेंसी ईडी (Enforcement Directorate) के सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपी बकीबुर रहमान की तीन शेल कंपनियों का पता चला, जिसमें डमी डायरेक्टर थे. जिनके जरिये राशन की खरीद फरोख्त हो रही थी. ये तीन कंपनिया हैं- हनुमान रियलकॉन प्रा. लिमिटेड (Hanuman Realcon Pvt. Ltd), ग्रेसियस इनोवेटिव प्रा. लिमिटेड (Gracious Innovative Pvt. Ltd) और ग्रेसियस क्रिएशन प्रा. लिमिटेड (Gracious Creation Pvt. Ltd). इन तीन कंपनियों में अवैध तरीके से 20 करोड़ से रुपये से ज्यादा आए. ये पैसा ज्यादातर कैश में आया. बकीबुर रहमान ने बताया कि इन कंपनियों का पैसा कर्ज के रूप में फूड एंड सप्लाई मंत्री ज्योतिप्रिय माल्लिक (Jyotipriya Mallick) को जा रहा है और वो इसके लाभार्थी हैं क्योंकि यह कर्ज वापस नहीं लिया गया. आरोपी बकीबुर रहमान ने भी माना कि वो पिछले कई साल से इस गोरखधंधे में लगा है. बकीबर रहमान को 14 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया था. वो ज्योतिप्रिय मलिक का बेहद करीबी है.

इस संबंध में आगे की जांच से पता चलता है कि तीन कंपनियों के पहले निदेशक और शेयरधारक ज्योतिप्रिय मल्लिक की पत्नी मणिदीप मल्लिक और उनकी बेटी प्रियदर्शिनी मल्लिक थीं. इन कंपनियों में बोगस शेयर प्रीमियम और अनाज के व्यापार से मिले फायदे के नाम पर पैसा जमा किया गया. इन कंपनियों से 20 करोड़ से ज्यादा रुपये बकीबुर रहमान के साले के बैंक एकाउंट में गया. 26 अक्टूबर को छापेमारी के दौरान ऐसा 16 करोड़ रुपया सीज कर दिया गया. छापेमारी के दौरान ईडी ने ज्योतिप्रिय माल्लिक के घर से इन कम्पनियों के स्टांप बरामद किए. उनके घर में काम करने वालों के बयान दर्ज हुए. ईडी के सूत्रों ने यह भी बताया की इन कम्पनियों में डायरेक्टर मलिक के परिवार के लोग हैं.

डायरी में लिखे थे कूट नाम
ईडी की छापेमारी के दौरान एक नंबर MIC नाम से लिखा मिला, जिसको 68 लाख रुपये का पेमेंट दिया हुआ दिखाया गया है. वो दरअसल मिनिस्टर ऑफ इंचार्ज था, जो असल में फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर थे. यह बताया गया कि ये पैसे बकीबुर रहमान के कहने पर मंत्री को दिए गए. बकीपुर रहमान ने मल्लिक और उसके परिवार के लिए फ्लाइट के टिकट भी बुक कराए. इसके भी सबूत मिले हैं. आगे की जांच के दौरान यह भी पता चला कि नवंबर 2016 से मार्च 2017 के दौरान मणिदीप मल्लिक के आईडीबीआई बैंक खाते में 6.03 करोड़ रुपये जमा किए गए थे. नवंबर 2016 के दौरान प्रियदर्शनी मल्लिक के आईडीबीआई बैंक खाते में 3.79 करोड़ रुपये जमा किए गए थे.

एक साल में मंत्री की पत्नी के खाते में 6 करोड़ से ज्यादा रकम जमा
4 अप्रैल 2016 को ज्योतिप्रिय माल्लिक ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो एफिडेविट फाइल किया था, उसमें अपनी पत्नी के खाते में केवल 45 हजार रुपये दिखाए थे. जबकि अगले ही साल उनके खाते में 6 करोड़ से ज्यादा आ गए. ज्योतिप्रिय माल्लिक के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान एक ‘मैरून रंग की डायरी’ रखी हुई पाई गई. जिसमें भारी मात्रा में सिलसिलेवार तरीके से कैश और रसीदों की पूरी जानकारी थी. इस डायरी में एमआईसी ज्योतिप्रिय मल्लिक को ‘बालूदा’ के नाम से जाना जाता है और तीन कंपनियों के नाम बताए गए हैं. इनमें एनपीजी का नाम था और लेनदेन के बारे में जानकारी थी.

ईडी ने बरामद की डायरी
ईडी ने जो डायरी जब्त की है, उसमें दिखाया गया कि ‘बालूदा’ यानी एमआईसी को कैश कैसे मिला. जो ज्योतिप्रिय मल्लिक और उनकी तीन कंपनियों में जमा किया गया था. जिन्हें पहले शारदा आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेसियस क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड), शारदा फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेसियस इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड) और हनुमान रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था. पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घोटाले को लेकर 22 फरवरी 2020 से लेकर 2022 तक कई केस दर्ज किए. पीडीएस राशन अवैध तरीके से बेचने के मामले में कई वितरक गिरफ्तार किए गए. ये राशन पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन स्कीम के तहत वेस्ट बंगाल पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के जरिए सप्लाई
होना था.

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राशन सप्लाई में भारी घोटाला
राशन सप्लाई की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल सरकार ने एनपीजी राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को दी थी. इसका डायरेक्टर बकीबुर रहमान था. छापेमारी के दौरान एक शख्स के यहां से डायरी मिली जिसमें खरीद-फरोख्त का डिटेल्स था. उस शख्स ने ईडी को बताया कि वो अवैध तौर पर पिछले 8-10 सालों से पीडीएस राशन की खरीद-फरोख्त कर रहा है. एक और शख्स ने बताया कि उसके पास पीडीएस राशन बेचने का लाइसेंस है लेकिन वो इस राशन को खुले बाजार में बेचता है. ये पूरा राशन एनपीजी राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड से आ रहा था. जो मिल मालिक की मिलीभगत से खुले बाजार में अवैध तरीके से बेचा जा रहा था. फ्लोर के मैनेजर ने अपने बयान में बताया कि वो सरकारी वितरकों को 20-40 प्रतिशत कम राशन सप्लाई करता है. ये राशन प्राइवेट दुकानदारों को जाता है. सबूत के तौर पर कई रजिस्टर जब किए गए. जिसमें पेमेंट और ऐसे वितरकों की पूरी जानकारी थी. ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार के अलग-अलग विभागों के 100 से ज्यादा स्टांप भी बरामद किए हैं.

Tags: Bengal news, Enforcement directorate, Ration Scam

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Author: Gypsy News

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