पवन सिंह कुंवर/ हल्द्वानी.उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के करीब 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक कंदमूल पाया जाता है, जिसे गेठी (Gethi Benefits) के नाम से जाना जाता है. यह औषधीय गुणों से भरपूर होती है. इसे एयर पोटैटो (Air Potato Benefits) भी कहा जाता है. आलू के आकार की दिखने वाली गेठी गर्म तासीर की होती है. पहाड़ों में बरसात के बाद अक्टूबर और नवंबर के महीने में यह बेलों में लगी हुई देखने को मिल जाएंगी. इस समय लोग गेठी इकट्ठा करके रख लेते हैं और फिर सर्दियों में इसे उबालकर सब्जी या सलाद के रूप में प्रयोग करते हैं.
गेठी ठंड के मौसम में काफी लाभदायक होती है. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे गर्म राख में पकाकर इसका सेवन करते हैं. इसे खांसी की अचूक औषधि माना जाता है. गेठी यानी एयर पोटैटो ऊर्जा का भी अच्छा स्रोत है. इसमें ग्लूकोज और रेशेदार फाइबर सही मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे खून में ग्लूकोज का स्तर बहुत धीरे बढ़ता है. गेठी में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिनके कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल कम बढ़ता है. साथ ही यह मोटापा घटाने में भी लाभदायक है. इसमे विटामिन बी प्रचुर मात्रा में मिलता है, जो त्वचा रोगों की रोकथाम में सहायक होता है.
चरक संहिता में भी गेठी का जिक्र
कुमाऊं विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ ललित तिवारी ने बताया कि गेठी का वानस्पतिक नाम डाओसकोरिया बल्बिफेरा है. इसके बारे में चरक संहिता में भी लिखा गया है. इसका मुख्य रूप से नाइजीरिया देश में उत्पादन होता है. इसको उबालकर या फिर राख में भूनकर खाया जाता है. कुछ लोग इसे सलाद के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि गेठी को दवाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. यह खांसी ठीक करने में लाभदायक है. इसमें ग्लूकोज और फाइबर काफी मात्रा में होता है, जिस वजह से यह एनर्जी बूस्टर का भी काम करती है. इसमें कॉपर, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीज भी होता है. यह विटामिन बी का एक बेहतरीन सोर्स है. इसका लेप लगाने से फोड़े-फुंसी ठीक हो जाती हैं. इस मौसम में गेठी बाजार में देखने को मिल जाती है. इसकी कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक होती है.
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FIRST PUBLISHED : November 15, 2023, 15:54 IST





