अर्पित बड़कुल / दमोह. हमारे आस पास भारी मात्रा में पाए जाने वाला यह आक अकौआ का पौधा आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण औषधी माना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम मदार है लेकिन दमोह जिले के ग्रामीण इलाकों में इसे अकौआ के नाम से जाना जाता है. जिसके फूल सफेद और हल्के बैगनी रंग के होते हैं.जिसका उपयोग सिर व कान दर्द मेंहोता है. इसके दूध को सिर पर लगाने से माइग्रेन में फायदा मिलता है. आक के पत्तों का रस कान में डालने से कान से संबंधित रोग जैसे कान में मवाद आना, सांय-सांय की आवाज आना, दूर हो जाती हैं.
चेहरे पर मौजूद काले धब्बे और झुर्रियों को दूर करने के लिए आधी चम्मच पिसी हुई हल्दी चूर्ण, अकौआ के पत्ते से निकलने वाले दूध को दो चम्मच ले जिसे गुलाब जल में अच्छी तरह से मिला लें. इसका लेप चेहरे पर लगाएं, इससे त्वचा मुलायम होती है. ध्यान रखे कि इसका लेप लगाते समय इसको आंखो से दूर लगाए. यह आखों के लिए घातक साबित होता हैं. जो भी महिला पुरूष अपनी त्वचा को मुलायम है और चेहरे पर निखार लाना चाहते हैं. वह आक के दूध या फिर इसकी डालियों के रस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
खाज- खुजली हो जाएगी दूर
आयुष विभाग चिकित्सक डॉ ब्रजेश कुलपारिया ने बताया कि अकौआ का पौधा बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि पौधा है. इसे मदार भी कहते हैं और इसका बोटैनिकल नाम है कैलोट्रोपिस ये काफी बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद में इसे उपविष में भी रखा गया है, यह पौधा थोड़ा विषैला होता है. इसकी पत्तियों को तोड़ने पर दूध निकलता है ये दूध अगर ताजे घाव में लग जाए तो यह काफी नुकसान पहुंचाता है. इसके अलावा घाव को ठीक करने में भी इसका उपयोग किया जाता है. कभी गांठ, दुस्तदरण होते हैं उनके उपचार के लिए अकौआ के पत्ते पर सरसों के हल्के गर्म तेल लगाकर गांठ पर बांधने से या खाज, खुजली वाले स्थान पर लगाने से रोग से छुटकारा मिल जाता है.
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FIRST PUBLISHED : November 9, 2023, 13:01 IST





